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निकिता भाटी से भी खौफनाक केस! पत्नी को गोरा होने की क्रीम बता दिया ज्वलनशील पदार्थ, फिर... कोर्ट ने सुनाया मृत्युदंड

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उदयपुर: नोएडा के निक्की भाटी हत्याकांड ने देशभर को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले की तफ्तीश जारी है। लेकिन इसी बीच राजस्थान के उदयपुर में एक ऐसे की केस में अदालत ने नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पत्नी की नृशंस हत्या के मामले में आरोपी पति को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। मावली अपर जिला एवं सेशन न्यायालय ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियुक्त ने केवल अपनी पत्नी लक्ष्मी के साथ ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के साथ अपराध किया है। कोर्ट ने किशन लाल उर्फ किशनदास को फांसी के साथ-साथ 50 हजार रुपए का जुर्माना और एक साल का कठोर कारावास भी सुनाया। आदेश के अनुसार, आरोपी को गर्दन से तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मौत नहीं हो जाती।



ऐसे किया पत्नी को प्रताड़ित

सरकारी वकील दिनेश पालीवाल ने बताया कि कोर्ट ने 30 अगस्त को यह निर्णय दिया। जज राहुल चौधरी ने फैसले में कहा कि यह अपराध समाज को हिला देने वाला है और आरोपी को सुधारने या समाज में शामिल करने का कोई औचित्य नहीं है। यह मामला वल्लभनगर पुलिस थाना क्षेत्र के नवानिया गांव का है, जहां किशनलाल अपनी पत्नी लक्ष्मी को बार-बार ‘काली और मोटी’ कहकर ताना मारता था। वह उसे अपने लायक नहीं मानता था और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था, जिससे लक्ष्मी गोरा होने की चाह में अपने पति की बातों को गंभीरता से लेने लगी थी।







जलाकर पत्नी की ले ली जान

24 जून 2017 की रात लगभग 12 बजे, जब दोनों सो रहे थे, किशनलाल ने पत्नी से कहा कि वह एक दवाई लाया है जिससे वह गोरी हो जाएगी। लक्ष्मी ने जब उस दवाई को सूंघा, तो उसे एसिड जैसी गंध आई। पति की खुशी के लिए लक्ष्मी ने कपड़े उतारकर अपने शरीर पर दवाई लगवाई। इसके बाद किशनलाल ने अगरबत्ती जलाकर उसके शरीर के पास लाया।



अगरबत्ती से लक्ष्मी के शरीर में आग लग गई। किशनलाल यहीं नहीं रुका, उसने बोतल में बचा हुआ द्रव्य भी लक्ष्मी की देह पर डाल दिया, जिससे आग और फैल गई। आग लगने के बाद वह डरकर मौके से भाग गया। घर में मौजूद सास, ससुर और ननद ने पानी डालकर आग बुझाई।



कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

गंभीर रूप से झुलसी लक्ष्मी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने मरने से पहले मजिस्ट्रेट को पूरी घटना की जानकारी दी। कनक अस्पताल में महिला की मौत हो गई। जज ने सुनवाई में कहा कि आरोपी का यह कृत्य समाज को हिला देने वाला है और उसे किसी भी हाल में माफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत फांसी देने का आदेश दिया।



यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी है कि ऐसे घिनौने अपराध किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किए जा सकते। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसा जघन्य कृत्य सभ्य समाज में सोचा भी नहीं जा सकता और आरोपी को सजा देकर न्याय किया गया है।

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