रांची, 28 अगस्त (Udaipur Kiran) । पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने नगड़ी विवाद पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी के बयान कहा कि नगड़ी में जब आदिवासी-मूलवासी अपनी जमीन बचाने जुटे तो सरकार में शामिल स्वास्थ्य मंत्री उन्हें बाहरी कहने में लगे हैं।
उन्होंने कहा कि असल में जिन्हें बंग्लादेशी घुसपैठिए अपने लगते हैं, उन्हें झारखंड के असली आदिवासी और मूलवासी बाहरी ही नजर आएंगे। चंपाई गुरुवार को विधानसभा सभागार परिसर में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि नगड़ी की कृषि योग्य जमीन पूरी तरह वहां के किसानों की है। इस भूमि का अधिग्रहण 1957–58 में हुआ था और ग्रामीणों ने 2012–13 तक लगान चुकाया। झारखंड राज्य गठन के बाद रिंग रोड परियोजना में कुछ रैयतों की जमीन अधिग्रहित हुई और मुआवजा भी दिया गया। लेकिन अब सरकार किसानों को रोकने की कोशिश कर रही है। ऐसा होने नहीं दिया जाएगा।
चंपाई ने कहा कि नगड़ीवासियों ने हल चलाकर साबित कर दिया है कि यह उनकी पुश्तैनी जमीन है और इसे हर हाल में बचाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आदिवासी-मूलवासी की आवाज दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी।
उन्होंने नगड़ी के रिम्स-2 के लिए चिन्हित जमीन के समीप महादरबार लगाने का ऐलान किया। कहा कि महादरबार में लगभग दो लाख आदिवासी जुटेंगे। अक्टूबर में दरबार लगने की संभावना है।उन्होंने कहा कि इस महादरबार के जरीए राज्य सरकार की आदिवासी विरोधी नीतियों को उजागर किया जाएगा। चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार आदिवासी समाज के अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रही है।चंपाई सोरन ने कहा कि राज्यभर के किसानों को उनकी जमीन से बेदखली करने के खिलाफ न्याय होगा।
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(Udaipur Kiran) / Manoj Kumar
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