–खंडपीठ ने किया एकलपीठ का आदेश रद्द ,नये सिरे से याचिका तय करने का निर्देश
प्रयागराज, 28 अगस्त (Udaipur Kiran) । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि सरकारी सस्ते गल्ले की दूकान का लाइसेंस निरस्त करने की वैधता की चुनौती याचिका में यदि इस बीच किसी को लाइसेंस आवंटित किया गया है तो उसे पक्षकार बनाना जरूरी है। वह आवश्यक पक्षकार है।
कोर्ट ने उच्चतम न्यायालय के फैसले के हवाले से कहा कि नये आवंटी को कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है। किन्तु उसे निरस्तीकरण आदेश का बचाव करने के लिए पक्ष रखने का अधिकार है।
खंडपीठ ने एकलपीठ के समक्ष अपीलार्थी को पक्षकार बनाए बगैर पारित आदेश को रद्द कर दिया है और अपीलार्थी को याचिका में पक्षकार बनाकर गुण-दोष पर सुनवाई के लिए प्रकरण एकलपीठ को वापस कर दिया है।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरूण भंसाली तथा न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने हीरामणि यादव की विशेष अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। अपील पर अधिवक्ता इंदु शेखर त्रिपाठी ने बहस की।
मालूम हो कि, सरकारी सस्ते गल्ले की दूकान का लाइसेंस एसडीएम केराकत जिला जौनपुर ने 2020 मे निरस्त कर दिया और 2021 में एकता स्वयं सहायता समूह को अध्यक्ष के मार्फत दुकान आवंटित कर दिया गया। लाइसेंस निरस्त करने को चुनौती दी गई। किन्तु नये आवंटी को पक्षकार नहीं बनाया। कहा, वह जरुरी पक्षकार नहीं है। एकलपीठ ने याचिका स्वीकार कर ली। जिसे अपील में चुनौती दी गई कि अपीलार्थी जरूरी पक्षकार है उसे पक्षकार नहीं बनाया गया और उसे सुने बगैर आदेश दिया गया है। दोनों तरफ से परस्पर विरोधी तर्क दिए गए तथा दलीलें भी पेश की गई।
याची का कहना था कि अपीलार्थी को उसकी दूकान निरस्त होने के बाद दूकान दी गई है। याची ने निरस्तीकरण को चुनौती दी है। इससे बाद में आवंटी का कोई सरोकार नहीं। वह जरूरी पक्षकार नहीं है। इसलिए पक्षकार बनाना जरूरी नहीं है।
किंतु अपीलार्थी का कहना था कि याची की दूकान निरस्त कर उसे आवंटित किया गया है। यदि याची के पक्ष में आदेश होता है तो उसका हित प्रभावित होगा। इसलिए वह जरूरी पक्षकार है। उसे सुनकर ही निरस्तीकरण पर फैसला लेना चाहिए। खंडपीठ ने अपीलार्थी के तर्क में बल पाते हुए उसे पक्षकार बनाकर याचिका की नये सिरे से सुनवाई करने का आदेश दिया है।
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(Udaipur Kiran) / रामानंद पांडे
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